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आम की फसल पर मक्खियों का खतरा, किसान ऐसे करें बचाव

आम की फसल पर मंडरा रहा खतरा
आम की फसल पर मंडरा रहा खतरा

गर्मी के मौसम में आम की मिठास हर किसी को भाती है, लेकिन अप्रैल और मई के महीने आम के बागों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होते हैं। इन महीनों में आम की सबसे खतरनाक दुश्मन बनकर आती है फल मक्खी (Fruit Fly), जो पके हुए या अधपके फलों को बर्बाद कर देती है। यह न केवल किसानों को भारी आर्थिक नुकसान देती है, बल्कि आम के निर्यात पर भी असर डालती है, जिससे देश को करोड़ों रुपये का घाटा होता है।

आम के बागों में कैसे फैलता है यह कीट:

अप्रैल-मई में फल मक्खी अपने अंडे आम के छिलके में देती है। अंडों से निकली सुंडियां फल के गूदे को खा जाती हैं, जिससे आम सड़ने लगता है और बाजार में बेचने लायक नहीं रहता। यदि समय रहते रोकथाम न की जाए, तो किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो सकती है, खासकर उन किसानों के लिए जो आम को विदेशों में भेजकर अच्छी कमाई करते हैं।

रोकथाम के लिए ट्रैप और साफ-सफाई सबसे जरूरी:

इसकी रोकथाम के लिए फेरोमोन ट्रैप एक बेहतरीन उपाय है। प्रति हेक्टेयर 15-20 ट्रैप लगाकर फल मक्खी की संख्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ट्रैप को पेड़ों की छायादार शाखाओं में लगाना चाहिए और हर 6 से 10 सप्ताह में इसकी गंध बदलते रहना जरूरी है। किसान चाहें तो बाज़ार से ट्रैप खरीद सकते हैं या घर पर भी इसे बना सकते हैं।

रसायनों से दूरी, प्राकृतिक तरीका है बेहतर:

बिना रसायन के ट्रैप एक मेल एनीहिलेशन टेक्नीक पर काम करता है, जिससे केवल नर मक्खी मारी जाती है और मादा अंडे नहीं दे पाती। इसके अलावा, संक्रमित फलों को एकत्र कर गड्ढों में दबाना, बाग को साफ रखना, और जरूरत पड़ने पर डेल्टामेथ्रिन या डिमेथोएट का सीमित उपयोग भी मददगार है।

किसानों के लिए सलाह: अगर किसान समय पर सतर्क हो जाएं और वैज्ञानिक तरीके अपनाएं, तो फल मक्खी जैसे खतरनाक कीट से आम की फसल को बचाया जा सकता है। इससे आम की गुणवत्ता बनी रहती है, बाज़ार में अच्छा दाम मिलता है और निर्यात के रास्ते भी खुले रहते हैं।

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