भोपाल में प्रमुख सचिव पर्यावरण डॉ. नवनीत मोहन कोठारी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के उपायों पर चर्चा हुई। इस बैठक में कृषि, पर्यावरण, उद्योग, शिक्षा और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में पराली जलाने से होने वाले नुकसान, किसानों की चुनौतियों और उनके लिए बेहतर समाधान तलाशने पर जोर दिया गया।
हर साल फसल कटाई के बाद बचे हुए अवशेषों को जलाने के अलावा किसानों के पास अधिक विकल्प नहीं होते। पराली के निस्तारण की प्रक्रिया महंगी और समय लेने वाली होती है, जिससे वे इसे जलाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। हालांकि, इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। सरकार अब किसानों को इस समस्या का समाधान देने के लिए ठोस कदम उठा रही है। पराली जलाने से बचने के लिए सरकार ने विभिन्न योजनाओं पर काम शुरू किया है, जिसमें मशीनों की उपलब्धता, पराली के वैकल्पिक उपयोग और किसानों को जागरूक करने पर ध्यान दिया जाएगा।
किसानों के लिए नए अवसर: सरकार ने किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए वैकल्पिक समाधानों पर काम करने की बात कही है। पराली से जैविक खाद, पशु चारा, ईंधन ब्रिकेट और अन्य उपयोगी उत्पाद बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा, कई उद्योग भी पराली खरीदने के लिए आगे आ रहे हैं, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ हो सकता है।
सरकार वायु प्रदूषण को कम करने और किसानों को बेहतर विकल्प देने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। पराली जलाना केवल किसानों की समस्या नहीं, बल्कि यह पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है। यदि किसानों को सही संसाधन, जागरूकता और आर्थिक सहायता मिले, तो वे पराली जलाने की बजाय अन्य टिकाऊ विकल्पों को अपना सकते हैं। इस दिशा में सरकार, उद्योग और किसान मिलकर काम करेंगे तो इसका लाभ सभी को मिलेगा।
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