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Bitter gourd farming: जानें करेले की उन्नत खेती का तरीका, उपयुक्त मौसम, किस्में और सरकार की सब्सिडी से जुड़ी अहम जानकारी

करेले की खेती
करेले की खेती

देशभर में अब किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियों की खेती की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं। सब्जियों में करेला एक ऐसी फसल है जिसकी बाजार में मांग हमेशा बनी रहती है। करेले में विटामिन A, B, C के अलावा जिंक, पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयरन और मैंगनीज़ जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो इसे औषधीय गुणों से भरपूर बनाते हैं। यह डायबिटीज और शुगर के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है।

क्या है वर्टिकल फार्मिंग What is vertical farming:

वर्टिकल फार्मिंग का अर्थ है कम जगह में अधिक उत्पादन। इसमें सब्जियों को परतों में या ऊंचाई की दिशा में उगाया जाता है। करेले की वर्टिकल खेती के लिए बांस और तार का उपयोग कर मचान तैयार किया जाता है, जिस पर बेलें चढ़ाई जाती हैं। कुछ किसान इसे पूरी तरह ऑर्गेनिक तरीके से कर रहे हैं, जिससे बाजार में उन्हें बेहतर दाम मिल रहे हैं।

करेले की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी और जलवायु Suitable soil and climate for bitter gourd cultivation:

करेले की खेती के लिए बलुई दोमट या नदी किनारे की जलोढ़ मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। तापमान 25 से 35 डिग्री सेल्सियस और जलवायु गर्म और आर्द्र वातावरण बेहतर होती है।

करेले की बुवाई का सही समय: साल में दो बार खेती कर किसान बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। जायद सीजन में करेले की बुवाई फरवरी-मार्च में बुवाई, मई-जून में तुड़ाई की जाती है और खरीफ सीजन में जून-जुलाई में बुवाई, अगस्त-सितंबर में तुड़ाई की जाती है। 

करेले की उन्नत किस्में:

  1. पूसा विशेष
  2. अर्का हरित
  3. पूसा हाइब्रिड-2
  4. कल्याणपुर बारहमासी
  5. पूसा औषधि
  6. पंजाब करेला-1

करेले की खेती की विधि Method of cultivation of bitter gourd:

  1. खेत की तैयारी करते समय गोबर की खाद डालें
  2. कल्टीवेटर से जुताई करके मिट्टी को भुरभुरी बनाएं
  3. खेत में नालियां बनाएं, जिससे जलभराव न हो
  4. बुवाई से पहले बीज उपचार करें
  5. एक एकड़ में लगभग 600 ग्राम बीज की आवश्यकता
  6. पौधे से पौधे की दूरी 70 सेमी और नाली से नाली की दूरी 2 मीटर रखें
  7. बेल निकलने के बाद मचान पर चढ़ाएं

जाल विधि से होगी अधिक पैदावार: जाल विधि करेले की खेती की सबसे सफल तकनीक मानी जाती है। इससे बेलें खुले में फैलती हैं, जिससे फसल सड़ने की संभावना कम होती है और जानवरों से सुरक्षा मिलती है। खाली क्यारियों में धनिया, मैथी जैसी फसलें भी उगाई जा सकती हैं। यानी एक साथ दो से तीन फसलों से लाभ ले सकते हैं। करेले की खेती से लगभग ₹30,000 प्रति एकड़ कमा सकते हैं।

सरकार से कितनी मिलती है सब्सिडी? राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत हाइब्रिड सब्जियों की खेती पर प्रति हेक्टेयर ₹50,000 लागत निर्धारित है, जिसमें सामान्य क्षेत्र में 40% यानी ₹20,000 प्रति हेक्टेयर और पूर्वोत्तर व पर्वतीय क्षेत्र में 50% यानी ₹25,000 प्रति हेक्टेयर तक सब्सिडी दी जाती है।

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