By khetivyapar
पोस्टेड: 06 Dec, 2024 12:00 AM IST Updated Fri, 06 Dec 2024 08:54 AM IST
प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत, आईसीएआर-सेन्ट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर एक्वाकलचर (आईसीएआर-सीआईएफए) ने मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय की वित्तीय सहायता से "रंगीन मछली" ऐप विकसित किया है। इस ऐप का उद्देश्य सजावटी मछलियों और मत्स्यपालन के व्यापार को प्रोत्साहित करना है, और यह ऐप आठ भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे यह व्यापक उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध हो सके।
रंगीन मछली ऐप के उद्देश्य Objectives of Colorful Fish App:
- लोकप्रिय सजावटी मछलियों की प्रजातियों और उनकी देखभाल के बारे में जानकारी प्रदान करना।
- एक्वेरियम दुकानों की सक्रिय निर्देशिका के माध्यम से स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा देना।
- सजावटी जलकृषि तकनीकों का ज्ञान बढ़ाकर मत्स्य किसानों और दुकान मालिकों को सशक्त बनाना।
रंगीन मछली ऐप की प्रमुख विशेषताएँ और लाभ Key Features and Benefits of Colorful Fish App:
- ऐप में आठ भारतीय भाषाओं में सामग्री उपलब्ध है, जो उपयोगकर्ताओं के लिए एक्सेसिबिलिटी सुनिश्चित करती है।
- सजावटी मछलियों की देखभाल, प्रजनन और रखरखाव से संबंधित जानकारी प्रदान करना।
- यह ऐप एक्वेरियम दुकान मालिकों को अपने व्यवसाय को बढ़ाने में सहायता करता है और मत्स्य प्रेमियों को सजावटी मछली और एक्वेरियम उत्पादों के विश्वसनीय स्रोतों तक पहुंच प्रदान करता है।
- ऐप में एक्वेरियम फिलट्रेशन, प्रकाश व्यवस्था, फीडिंग और दैनिक रखरखाव जैसे विषयों पर जानकारी दी जाती है।
प्राकृतिक पर्ल कल्चर को बढ़ावा : भारत सरकार ने राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों और अन्य संबंधित एजेंसियों के सहयोग से प्राकृतिक पर्ल फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। इसके तहत प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत 461.00 लाख रुपये की लागत से 2307 बाइवाल्व कल्टीवेशन इकाइयां प्रसारित की गई हैं।
पर्ल क्लस्टर और हैचरी विकास Pearl Cluster and Hatchery Development:
- मत्स्यपालन विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मंचों पर प्राकृतिक पर्ल फार्मिंग और इसके आर्थिक महत्व को प्रदर्शित करने के लिए पर्ल किसानों को सहायता प्रदान की जाएगी।
- पीएमएमएसवाई के अंतर्गत पर्ल क्लस्टर और जल कृषि क्षेत्र में क्लस्टरों के विकास के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की गई है।
- झारखंड राज्य में हजारीबाग में पर्ल फार्मिंग क्लस्टर की अधिसूचना और विकास किया गया है।
- आईसीएआर-सेंट्रल मरीन रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएमएफआरआई) ने तमिलनाडु के तूतीकोरिन क्षेत्र में 1.65 करोड़ हैचरी द्वारा उत्पादित सीड रेंच किए हैं।
- राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड ने झारखंड के हजारीबाग जिले में 1.02 लाख पर्ल उत्पादित होने की जानकारी दी है।
फ्रेशवॉटर और मरीन पर्ल फार्मिंग पर प्रशिक्षण: आईसीएआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर एक्वाकल्चर (सीआईएफए), भुवनेश्वर ने पिछले पांच वर्षों में राज्य मात्स्यिकी विभागों के सहयोग से 1500 से अधिक प्रतिभागियों को फ्रेशवॉटर पर्ल फार्मिंग पर 15 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। आईसीएआर-सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएमएफआरआई), कोच्चि ने केरल में 400 से अधिक प्रतिभागियों को मरीन पर्ल फार्मिंग पर क्षेत्रीय भाषा में प्रशिक्षण प्रदान किया है।