भारत सरकार ने सितंबर 2024 में डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन को मंजूरी दी, जिसके लिए कुल ₹2817 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। इस मिशन के तहत एग्रीस्टैक, कृषि निर्णय सहायता प्रणाली (Krishi Decision Support System) और व्यापक मृदा उर्वरता एवं प्रोफाइल मानचित्र (Soil Fertility & Profile Map) जैसी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) विकसित की जा रही हैं। इसका उद्देश्य देश में एक मजबूत डिजिटल कृषि पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना है, जिससे किसानों को सटीक और समय पर फसल संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जा सके।
इस मिशन के तहत एग्रीस्टैक DPI में कृषि क्षेत्र से जुड़ी तीन मुख्य डेटाबेस/रजिस्ट्रियां शामिल हैं:
इन सभी डेटाबेस को राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा तैयार और प्रबंधित किया जा रहा है।
सरकार ने 2026-27 तक 11 करोड़ किसानों की डिजिटल आईडी (Farmer ID) तैयार करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, खरीफ 2025 से सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण किया जाएगा। अब तक 4,85,57,246 किसान आईडी (28 मार्च 2025 तक) जारी की जा चुकी हैं। खरीफ 2024 में 436 जिलों में और रबी 2024-25 में 461 जिलों में 23.90 करोड़ से अधिक भूखंडों का डिजिटल सर्वेक्षण किया गया है।
राज्यों को दी जा रही वित्तीय और तकनीकी सहायता: डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है, जिसमें शामिल हैं, किसान आईडी और डिजिटल फसल सर्वेक्षण के लिए सॉफ्टवेयर, राज्य अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, परियोजना निगरानी इकाई (Project Monitoring Unit) के लिए मानव संसाधन भर्ती का समर्थन और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा
राज्यों को विशेष केंद्रीय सहायता (SCA) योजना: वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (Department of Expenditure, DoE) ने राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए ₹5000 करोड़ की विशेष केंद्रीय सहायता (SCA) योजना शुरू की है। 28 मार्च 2025 तक ₹1076 करोड़ की राशि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश को जारी की गई है।
कैम्प-मोड अप्रोच को अपनाने की सलाह: सरकार ने राज्यों को कैम्प-मोड पद्धति अपनाने की सलाह दी है, जिसके तहत प्रत्येक कैम्प के लिए ₹15,000 की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इन कैम्पों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन को सक्रिय किया जाएगा और किसानों को डिजिटल पहचान से जोड़ा जाएगा।
किसान रजिस्ट्र्री को तेज़ी से पूरा करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन: PM-KISAN योजना के प्रशासनिक कोष से प्रत्येक किसान आईडी के लिए ₹10 का प्रावधान किया गया है, जो किसान रजिस्ट्र्री के निर्माण में लगे मैदानी कार्यकर्ताओं को मानदेय के रूप में दिया जाएगा। इससे किसान आईडी बनाने की प्रक्रिया को गति मिलेगी।
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