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किसानों को मिलेगा सही दाम, जल्दी खराब होने वाली फसलों पर सरकार की पहल

अब नहीं होगा फसल का नुकसान
अब नहीं होगा फसल का नुकसान

कृषि विपणन पर सरकार की सक्रिय भूमिका: कृषि विपणन एक राज्य का विषय है, लेकिन केंद्र सरकार समय-समय पर जरूरी कदम उठाती है ताकि किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिल सके और बाजार में मांग व आपूर्ति का संतुलन बना रहे। विशेष रूप से खराब होने वाली कृषि और बागवानी फसलों के दाम कई कारणों से प्रभावित होते हैं जैसे- मांग और आपूर्ति, व्यापार नीतियां, कर और शुल्क आदि।

बाजार की अस्थिरता से बचाने की योजनाएं:

किसानों को बाजार की अस्थिरता से बचाने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। इनमें बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) शामिल है, जिसके तहत जल्दी खराब होने वाली फसलों की सरकारी खरीद की जाती है। इसके अलावा राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों को ऑनलाइन बोली लगाकर बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद करते हैं।

किसानों को बाजार जानकारी की डिजिटल सुविधा:

Agmarknet पोर्टल के जरिए देशभर की मंडियों के ताजे दामों की जानकारी किसानों को दी जाती है, जिससे वे सही समय पर सही निर्णय ले सकें। कृषि अवसंरचना निधि (AIF) के तहत भंडारण गृह, कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट्स आदि के लिए रियायती ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे किसान फसल बेचने की बजाय उसे सुरक्षित रख सकें और अच्छे दाम मिलने पर ही बिक्री करें।

PM-AASHA के तहत किसानों की आय की सुरक्षा: किसानों को नुकसान से बचाने के लिए प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के अंतर्गत MIS योजना चलाई जाती है। यदि किसी फसल का उत्पादन बहुत अधिक हो और मंडियों में दाम गिर जाएं, तो राज्य सरकार के अनुरोध पर उस फसल की खरीद की जाती है। इसमें केंद्र और राज्य मिलकर लागत का हिस्सा उठाते हैं, जिससे किसानों को औने-पौने दामों पर फसल बेचने से बचाया जा सके।

2024-25 से MIS में नए बदलाव:

वर्ष 2024-25 से MIS में दो नई बातें जोड़ी गई हैं

  1. मूल्य अंतर भुगतान (PDP) के तहत किसानों को बाजार मूल्य और न्यूनतम हस्तक्षेप मूल्य (MIP) के बीच का अंतर सीधे दिया जाएगा।
  2. टमाटर, प्याज और आलू (TOP) फसलों की भंडारण व परिवहन लागत का भुगतान भी केंद्र सरकार करेगी, ताकि किसानों को सही समय पर बाजार उपलब्ध हो सके और फसल बर्बाद न हो।

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