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Lemon farming: गर्मियों में नींबू के पौधों की देखभाल के लिए अपनाएं ये जरूरी टिप्स, मिलेगा बेहतरीन उत्पादन

नींबू के पौधों की गर्मियों में ऐसे करें देखभाल
नींबू के पौधों की गर्मियों में ऐसे करें देखभाल

गर्मियों के समय नींबू की फसल के लिए देखभाल करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान पुष्पन, खाद प्रबंधन, सिंचाई, कीट एवं रोग नियंत्रण जैसे कार्यों को सही ढंग से करने से उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार होता है। वैज्ञानिक पद्धतियों का पालन करके किसान अपनी नींबू की फसल से अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

गर्मियों में नींबू की फसल के लिए आवश्यक कृषि कार्य:

1. पुष्पन एवं वृद्धि प्रबंधन:

  1. गर्मी के समय नींबू के पौधों में नई कोंपलें निकलने लगती हैं और पुष्पन शुरू हो जाता है।
  2. पुराने व सूखे टहनियों की छंटाई करें ताकि पौधों को उचित प्रकाश और हवा मिले।
  3. पुष्पन को बढ़ावा देने के लिए संतुलित पोषण दें ताकि अच्छे फल विकसित हो सकें।
  4. नई वृद्धि के साथ कीट एवं रोगों का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए समय पर रोकथाम करें।

2. खाद एवं पोषण प्रबंधन:

गर्मियों में पौधों को आवश्यक पोषक तत्व देने से उनकी वृद्धि और फलन में सुधार होता है। प्रति पौधा 200-250 ग्राम नाइट्रोजन, 100-150 ग्राम फास्फोरस और 150-200 ग्राम पोटाश का प्रयोग करें। कैल्शियम नाइट्रेट या पोटैशियम नाइट्रेट का छिड़काव करने से फूलों और फलों की गुणवत्ता में सुधार होगा। प्रति पौधा 10-15 किलोग्राम गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालें। जैव उर्वरकों जैसे एजोटोबैक्टर और फॉस्फेट सॉल्युबलाइजिंग बैक्टीरिया  का प्रयोग मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होता है।

3. सिंचाई प्रबंधन:

  1. मार्च में तापमान बढ़ने के कारण मिट्टी की नमी बनाए रखना जरूरी होता है।
  2. यदि वर्षा न हो तो 10-15 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करें।
  3. ड्रिप सिंचाई अपनाने से जल की बचत होगी और नमी पौधों की जड़ों तक पहुंचेगी।
  4. अत्यधिक सिंचाई से जड़ सड़न की समस्या हो सकती है, इसलिए आवश्यकता अनुसार पानी दें।

4. कीट एवं रोग नियंत्रण:

  1. सिट्रस लीफ माइनर – पत्तियों पर सुरंग बनाकर नुकसान पहुंचाता है। रोकथाम के लिए नीम तेल (1500 PPM) या डाइमिथोएट (0.05%) का छिड़काव करें।
  2. सिट्रस पायला – पत्तियों और टहनियों से रस चूसकर पौधों को कमजोर करता है। इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL (0.05%) का छिड़काव करें।
  3. कोललेटोट्रिकम फफूंद रोग – पत्तियों और फलों पर काले धब्बे बनाता है। रोकथाम के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (0.3%) या कार्बेन्डाजिम (0.1%) का छिड़काव करें।
  4. गमोसिस (गोंद रोग) – तने से गोंद निकलने लगता है। रोकथाम के लिए बोर्डो पेस्ट का लेप करें और प्रभावित भाग को साफ करके कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करें।

5. बाग की निगरानी और खरपतवार नियंत्रण:

गीली घास, भूसा, या काली पॉलीथिन से मल्चिंग करने से नमी बनी रहती है और खरपतवार नहीं उगते। खरपतवार हटाने के लिए ग्लाइफोसेट का नियंत्रित मात्रा में छिड़काव करें। फलों के गिरने की समस्या रोकने के लिये नियमित सिंचाई करें और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी न होने दें। बाग की नियमित निगरानी करें ताकि कीट और रोगों का समय पर पता चल सके।

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