जनजातीय कार्य विभाग की योजना के तहत प्रदेश में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातियों - भारिया, बैगा और सहरिया जातियों के लिए अलग से बटालियन गठित करने की योजना बनाई गई है। इस योजना के तहत जनजातियों के इच्छुक युवाओं को पुलिस, सेना, और होमगार्ड में भर्ती के लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के युवाओं को रोजगार और सेवा से जोड़ने के लिए पीवीटीजी बटालियन गठित करने के निर्देश दिए हैं। बैगा, भारिया और सहरिया जनजातियाँ पीवीटीजी श्रेणी में आती हैं।
आर्म्ड फोर्सेस में भर्ती के लिए जनजातीय कार्य विभाग द्वारा अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के युवाओं को नेवी, आर्मी, एयरफोर्स, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, पुलिस, होमगार्ड और अन्य निजी सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इस योजना के लिए एक कार्ययोजना तैयार की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें।
जनजातीय कार्य विभाग में विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए संचालक स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष एजेंसी भी कार्यरत है। यह एजेंसी प्रदेश के 15 जिलों में इन योजनाओं की निगरानी करती है और उनके अमल पर ध्यान देती है। साथ ही, राज्य स्तर पर इन जनजातियों के विकास के लिए 11 प्राधिकरण कार्यरत हैं। प्रत्येक प्राधिकरण में विशेष पिछड़ी जनजातीय वर्ग के एक व्यक्ति को अध्यक्ष और तीन अशासकीय सदस्यों को मनोनीत किया जाता है।
राज्य सरकार द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातियों को आहार अनुदान भी दिया जाता है। बैगा, भारिया और सहरिया जनजातियों के परिवारों की महिला मुखिया के बैंक खातों में प्रतिमाह 1500 रुपये दिए जा रहे हैं, जिससे उन्हें कुपोषण से बचाया जा सके। वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 अगस्त 2024 तक 2 लाख 18 हजार 563 हितग्राहियों को करीब 180 करोड़ रुपये से ज्यादा की आहार अनुदान राशि दी जा चुकी है।