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कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को मिलेगा बढ़ावा: मशीनीकरण, डिजिटल मिशन, ड्रोन व मृदा स्वास्थ्य योजना से सशक्त हो रहे किसान

नमो ड्रोन दीदी योजना
नमो ड्रोन दीदी योजना

‘राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’ के तहत क्रियान्वित ‘उप मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकनाइजेशन (SMAM)’ योजना को राज्य सरकारों के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को विभिन्न कृषि यंत्रों और उपकरणों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसमें फसल कटाई के बाद की प्रोसेसिंग तकनीकें भी शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, किसानों को किराये पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कस्टम हायरिंग सेंटर (CHCs) और गांव स्तर पर फार्म मशीनरी बैंक (FMBs) की स्थापना के लिए भी सहायता दी जाती है। योजना के तहत किसान ड्रोन की फील्ड डेमो, व्यक्तिगत स्तर पर ड्रोन की खरीद और ड्रोन सेवा प्रदान करने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना हेतु भी सहायता प्रदान की जा रही है।

नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत 15,000 ड्रोन देने का लक्ष्य:

महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सशक्त बनाने हेतु सरकार ने 'नमो ड्रोन दीदी' नामक केंद्रीय क्षेत्र योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत 2023-24 से 2025-26 तक 15,000 ड्रोन SHGs को प्रदान किए जाएंगे। वर्ष 2023-24 में लीड फर्टिलाइजर कंपनियों (LFCs) द्वारा अपने संसाधनों से 1,094 ड्रोन वितरित किए गए, जिनमें से 500 ड्रोन नमो ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत दिए गए हैं। शेष 14,500 ड्रोन वर्ष 2025-26 के अंत तक वितरित किए जाने का लक्ष्य है।

कृषि क्षेत्र की दिशा में बड़ा कदम:

सितंबर 2024 में सरकार ने ₹2,817 करोड़ की लागत से ‘डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन’ को मंजूरी दी। इस मिशन का उद्देश्य किसान-केंद्रित डिजिटल समाधान विकसित कर एक मजबूत डिजिटल कृषि ईकोसिस्टम तैयार करना है। मिशन के तहत ‘एग्रीस्टैक’, ‘कृषि निर्णय सहायता प्रणाली’, ‘समग्र मृदा उर्वरता एवं प्रोफ़ाइल मानचित्रण’ जैसी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना विकसित की जा रही है। इसके अलावा, किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि योजना संबंधी जानकारी देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैटबॉट 'किसान ई-मित्र' विकसित किया गया है।

ICAR द्वारा उन्नत कृषि तकनीकों का विकास:

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत विभिन्न संस्थानों द्वारा ड्रोन स्प्रे सिस्टम, एआई आधारित फसल तनाव पहचान उपकरण, स्मार्ट स्प्रेयर, स्वचालित पॉलीहाउस स्प्रेइंग सिस्टम, रोबोटिक ट्रांसप्लांटर, स्वचालित वीडर, इमेज बेस्ड रोग पहचान यंत्र, वैरिएबल-रेट नाइट्रोजन एप्लिकेटर, रोबोटिक टमाटर हार्वेस्टर, आदि जैसे अत्याधुनिक उपकरण विकसित किए गए हैं। ये तकनीकें सटीक खेती, संसाधन प्रबंधन और फसल उत्पादकता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं।

मिट्टी की उर्वरता सुधारने हेतु मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना: सरकार वर्ष 2014-15 से ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड (SHC)’ योजना चला रही है, जिसके अंतर्गत किसानों को उनकी भूमि की उर्वरता के बारे में जानकारी देकर उर्वरकों के संतुलित उपयोग हेतु मार्गदर्शन किया जाता है। अब तक 24.90 करोड़ SHCs जारी किए जा चुके हैं। देशभर में 1,068 स्थायी, 163 मोबाइल, 6,376 मिनी और 665 गांव स्तर की मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। किसानों को जागरूक करने के लिए 7 लाख से अधिक प्रदर्शन, 93,781 प्रशिक्षण कार्यक्रम और 7,425 कृषक मेलों का आयोजन किया गया है। इसके अतिरिक्त, 70,002 'कृषि सखियों' को प्रशिक्षण देकर किसानों को SHC की जानकारी देने के लिए तैयार किया गया है।

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