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गन्ना किसानों को बड़ी राहत: अब गन्ना किसानों को नहीं करना होगा भुगतान का इंतजार

गन्ना किसानों को बड़ी राहत
गन्ना किसानों को बड़ी राहत

देशभर के गन्ना किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अब उन्हें गन्ने का भुगतान एक साथ, यानी एकमुश्त मिलेगा। बॉम्बे हाईकोर्ट ने गन्ना किसानों के हक में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए महाराष्ट्र सरकार के उस सरकारी प्रस्ताव को अवैध और अमान्य घोषित कर दिया है, जिसके तहत एफआरपी (उचित एवं लाभकारी मूल्य) का भुगतान दो किस्तों में किया जाता था।

हाईकोर्ट ने सुनाया किसानों के पक्ष में फैसला:

गौरतलब है कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, गुजरात, ओडिशा, मध्य प्रदेश और तेलंगाना जैसे गन्ना उत्पादक राज्यों में अक्सर किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिल पाता। महाराष्ट्र में अब तक एफआरपी का भुगतान दो चरणों में किया जा रहा था, जिससे किसानों को वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
बॉम्बे हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ, न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति अद्वैत एम. सेठना ने स्पष्ट रूप से कहा कि महाराष्ट्र सरकार की यह नीति केंद्र सरकार द्वारा जारी गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 (Sugarcane Control Order - SCO) के विपरीत है।

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने आदेश में कहा कि गन्ना किसान पेराई सत्र की शुरुआत में चीनी मिलों को आपूर्ति किए गए गन्ने के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित एफआरपी के हकदार हैं।

14 दिनों के भीतर पूरा भुगतान अनिवार्य:

केंद्र सरकार के गन्ना नियंत्रण आदेश 1966 के अनुसार, चीनी मिलों को गन्ने की आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर किसानों को पूरा भुगतान करना अनिवार्य है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा इस आदेश के विपरीत दो किस्तों में भुगतान की व्यवस्था की गई थी। वहीं, कुछ चीनी मिलों ने भी हाईकोर्ट का रुख किया था।

केंद्र सरकार ने किसानों का दिया साथ:

राज्य सरकार का तर्क था कि दो किस्तों में भुगतान की नीति वास्तविक चीनी रिकवरी के आधार पर की जाती है, जिससे चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति बेहतर रहती है। हालांकि, केंद्र सरकार ने किसानों का समर्थन करते हुए स्पष्ट किया कि एफआरपी भुगतान की प्रणाली SCO 1966 और महाराष्ट्र गन्ना मूल्य विनियमन अधिनियम 2013 के अनुरूप ही होनी चाहिए।

क्या है एफआरपी?

एफआरपी यानी Fair and Remunerative Price वह न्यूनतम मूल्य है, जिसे केंद्र सरकार घोषित करती है और जिसके तहत चीनी मिलें किसानों से खरीदे गए गन्ने का भुगतान करने के लिए बाध्य होती हैं। एफआरपी प्रणाली की शुरुआत वर्ष 2009 में केंद्र सरकार द्वारा की गई थी, ताकि किसानों को उनके गन्ने का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जा सके।

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